
स्पृश्यते शोध्यते नात्मा मलिनेनामलेन वा ।
पर-द्रव्य-बहिर्भूतः परद्रव्येण सर्वथा ॥281॥
अन्वयार्थ : मलिनेन वा अमलेन परद्रव्येण आत्मा न स्पृश्यते शोध्यते । सर्वथा पर-द्रव्य-बहिर्भूत: ।
समल अथवा निर्मल कोई भी परद्रव्य आत्मा को स्पर्श नहीं कर सकता और आत्मा को शुद्ध भी नहीं कर सकता; क्योंकि आत्मा परद्रव्यों से सर्वथा बहिर्भूत है ।