+ कुतर्क का स्वरूप - -
बोधरोधः शमापायः श्रद्धाभंगोऽभिमानकृत् ।
कुतर्को मानसो व्याधिर्ध्यानशत्रुरनेकधा ॥354॥
अन्वयार्थ : कुतर्क: बोधरोध:, शमापाय:, श्रद्धाभंग: अभिमानकृत् (च) मानस: व्याधि: (तथा) अनेकधा ध्यानशत्रु: (अस्ति)
कुतर्क, ज्ञान को रोकनेवाला, शांति का नाशक, श्रद्धा को भंग / नष्ट करनेवाला और अभिमान को बढानेवाला मानसिक रोग है । ऐसा यह कुतर्क अनेक प्रकार से ध्यान का शत्रु है ।