
पक्वेऽपक्वे सदा मांसे पच्यमाने च संभवः ।
तज्जातीनां निगोदानां कथ्यते जिनपुंगवैः ॥416॥
अन्वयार्थ : पक्वे, अपक्वे, च पच्यमाने मांसे जिनपुंगवै: तज्जातीनां निगोदानां सदा संभव: कथ्यते ।
मांस चाहे कच्चा हो, चाहे आग से पकाया गया हो, चाहे आग पर पक रहा हो - तीनों प्रकार के उस मांस में जिनेन्द्र देवों ने जिस जीव का मांस है - उस ही जाति के निगोदिया जीव रूप में निरन्तर उत्पन्न होते रहते हैं ।