+ असंमोहपूर्वक कार्य का फल - -
सन्त्यसंमोहहेतूनि कर्माण्यत्यन्तशुद्धितः ।
निर्वाणशर्मदायीनि भवातीताध्वगामिनाम् ॥442॥
अन्वयार्थ : (यानि) कर्माणि असंमोहहेतूनि सन्ति (तानि) अत्यन्त-शुद्धित: भवातीताध्व- गामिनां निर्वाणशर्मदायीनि (भवन्ति)
जो कार्य असंमोहपूर्वक अर्थात् वीतरागमय होते हैं, वे कार्य अत्यंत शुद्धि के कारण एवं स्वतः शुद्ध होते हैं; इसलिए भवातीतमार्ग अर्थात् मोक्षमार्ग पर चलनेवालों को निर्वाण / मोक्ष सुख के प्रदाता होते हैं ।