+ व्यावहारिक चारित्र के दो भेद - -
यो व्यावहारिकः पन्थाः सभेद-द्वय-संगतः ।
अनुकूलो भवेदेको निर्वृतेः संसृतेः परः ॥452॥
अन्वयार्थ : य: व्यावहारिक: पन्था: (अस्ति; स:) सभेद-द्वय-संगत: (भवति) । एक: निर्वृते: अनुकूल: भवेत् पर: संसृते: (अनुकूल: भवेत्)
व्यावहारिकचारित्ररूप जो मार्ग अर्थात् उपाय है, उसके दो भेद हैं - एक निर्वाण / मुक्ति के लिये अनुकूल है और दूसरा संसार के लिए अनुकूल है ।