+ परम भक्ति का स्वरूप - -
निर्वाणे परमा भक्तिः पश्यतस्तद्गुणं परम् ।
चित्र-दुःखमहाबीजे नष्टे सति विपर्यये ॥484॥
अन्वयार्थ : चित्र-दु:खमहाबीजे विपर्यये नष्टे सति निर्वाणे परं तद्गुणं पश्यत: परमा भक्ति: (भवति)
अनेक प्रकार के दुःखों के बीजस्वरूप मिथ्यात्व के नष्ट होने पर निर्वाण अर्थात् मुक्त-अवस्था में प्राप्त होनेवाले सर्वोत्तम गुणसमूहों को देखने-जाननेवाले साधक को परमभक्ति व्यक्त होती है ।