+ भाव से नग्न हो सच्चा मोक्ष-मार्गी -
जइया मणु णिग्गंथु जिय, तइया तुहुँ णिग्गंथु
जइया तुहुँ णिग्गंथु जिय, तो लब्भइ सिवपंथु ॥73॥
हो जाय जब निर्ग्रन्थ मन निर्ग्रन्थ तब ही तू बने
निर्ग्रन्थ जब हो जाय तू तब मुक्ति का मारग मिले ॥
अन्वयार्थ : [जइया मणु णिग्गंथु जिय] जब तेरा मन निर्ग्रन्थ होगा हे जीव ! [तइया तुहुँ णिग्गंथु] तभी तू सच्चा निर्ग्रन्थ होगा [जइया तुहुँ णिग्गंथु जिय] जब तू निर्ग्रन्थ होगा, [तो लब्भइ सिवपंथु] तभी मोक्षमार्ग को प्राप्त कर सकेगा ।