+ दो को छोड़ दो गुण सहित आत्मा में वास करो -
बे छंडिवि बे-गुण-सहिउ, जो अप्पाणि वसेइ
जिणु सामिउ एमइँ भणइ, लहु णिव्वाणु लहेइ ॥77॥
दो छोड़कर दो गुण सहित परमातमा में जो बसे
शिवपद लहें वे शीघ्र ही - इस भाँति सब जिनवर कहें ॥
अन्वयार्थ : [बे छंडिवि बे-गुण-सहिउ] दो (राग-द्वेष) छोड़कर और दो (ज्ञान-दर्शन) सहित होकर [जो अप्पाणि वसेइ] जो आत्मा में निवास करता है, [जो अप्पाणि वसेइ] जिन स्वामी ऐसा कहते हैं [लहु णिव्वाणु लहेइ] वह शीघ्र ही निर्वाण को प्राप्त करता है ।