
जहिँ अप्पा तहिँ सयल-गुण, केवलि एम भणंति
तिहिँ कारणएँ जोइ फुडु, अप्पा विमलु मुणंति ॥85॥
जिन-केवली ऐसा कहें - 'तहँ सकल गुण जहँ आतमा'
बस इसलिए ही योगीजन ध्याते सदा ही आतमा ॥
अन्वयार्थ : [जहिँ अप्पा तहिँ सयल-गुण] जहाँ आत्मा है, वहीं सारे गुण हैं, [केवलि एम भणंति] ऐसा केवलज्ञानी कहते हैं [तिहिँ कारणएँ जोइ फुडु] स्पष्टत: यही कारण है कि योगीजन सदा [अप्पा विमलु मुणंति] निर्मल आत्मा को ही जानते रहते हैं ।