
जइ बद्धउ मुक्कउ मुणहि, तो बंधियहि णिभंतु
सहज-सरूवइ जइ रमहि, तो पायहि सिव संतु ॥87॥
यदि बद्ध और अबद्ध माने बँधेगा निर्भ्रान्त ही
जो रमेगा सहजात्म में तो पायेगा शिव शान्ति ही ॥
अन्वयार्थ : [जइ बद्धउ मुक्कउ मुणहि] यदि बद्ध या मुक्त मानेगा [तो बंधियहि णिभंतु] तो निःसन्देह बँधेगा और [सहज-सरूवइ जइ रमहि] यदि तू सहज-स्वरूप में रमण करेगा [तो पायहि सिव संतु] तो मोक्षरूप शान्त अवस्था को प्राप्त करेगा ।