+ सम्यक्त्वी ही पंडित व प्रधान है -
जो सम्मत्त-पहाण बुहु, सो तइलोय-पहाणु
केवल-णाण वि लहु लहइ, सासय-सुक्ख-णिहाणु ॥90॥
सम्यक्त्व का प्राधान्य तो त्रैलोक्य में प्राधान्य भी
बुध शीघ्र पावे सदा सुखनिधि और केवलज्ञान भी ॥
अन्वयार्थ : [जो सम्मत्त-पहाण बुहु] जो सम्यक्त्व-प्रधान ज्ञान है, [सो तइलोय-पहाणु] वही तीन लोक में श्रेष्ठ है [केवल-णाण वि लहु लहइ] उसी से शीघ्र केवलज्ञान प्राप्त होता है (एवं) [सासय-सुक्ख-णिहाणु] शाश्वत सुख के निधान को प्राप्त होता है ।