
पुरिसायार-पमाणु जिय, अप्पा एहु पवित्तु
जोइज्जइ गुण-गण-णिलउ, णिम्मल-तेय-फुरंतु ॥94॥
पुरुष के आकार जिय गुणगणनिलय सम सहित है
यह परमपावन जीव निर्मल तेज से स्फुरित है ॥
अन्वयार्थ : [जिय] हे जीव ! [पुरिसायार-पमाणु] पुरुषाकार प्रमाण [अप्पा एहु पवित्तु] यह आत्मा पवित्र है, [गुण-गण-णिलउ] गुणों का भण्डार है [जोइज्जइ] ऐसा देखो [णिम्मल-तेय-फुरंतु] जिससे निर्मल तेज स्फुरायमान हो ।