+ आत्म-दर्शन ही सिद्ध होने का उपाय -
जे सिद्धा जे सिज्झिहिहिँ, जे सिज्झहिँ जिण-उत्तु
अप्पा-दंसणिँ ते वि फुडु, एहउ जाणि णिभंतु ॥107॥
जो होएंगे या हो रहे या सिद्ध अब तक जो हुए
यह बात है निर्भ्रान्त वे सब आत्मदर्शन से हुए ॥
अन्वयार्थ : [जे सिद्धा जे सिज्झिहिहिँ] जो सिद्ध हुए हैं, जो होंगे और [जे सिज्झहिँ जिण-उत्तु] जो वर्तमान में हो रहे हैं, जिनेन्द्र भगवान ने कहा है [अप्पा-दंसणिँ ते वि फुडु] वे सब आत्म-दर्शन से ही हो रहे हैं - [एहउ जाणि णिभंतु] ऐसा निःसन्देह जानो ।