
न पुनर्द्रव्यान्तरवत्संज्ञा भेदोप्पवाधितो भवति ।
तत्र विधौ विधिमात्राच्छेषविशेषादिलक्षणाभावात् ॥301॥
अन्वयार्थ : विधि और निषेध में भिन्न-भिन्न द्रव्यों के समान संज्ञाभेद नहीं है, उसमें बाधा आती है क्योंकि जब विधि कहते हैं तो वस्तु विधिमात्र रहेगी बाकी के विशेष लक्षण का उसमें अभाव रहेगा अत: द्रव्यांतर के समान संज्ञाभेद नहीं है किन्तु सापेक्ष भेद है, वस्तु एक ही है ।