
इत्यादिकाश्च बहवो विद्यन्ते पाक्षिका हि दृष्टान्ताः ।
तेषामुभयान्गत्वान्नहि कोपि कदा विपक्ष: स्यात् ॥306॥
अन्वयार्थ : पट की तरह और भी अनेक ऐसे दृष्टान्त हैं, जो कि हमारे पक्ष को पुष्ट करते हैं, वे सभी दृष्टान्त उभयपने को सिद्ध करते हैं, इसलिये उनमें से कोई भी दृष्टान्त कभी हमारा विपक्ष नहीं होने पाता है ।