
सत्यं तत्रोत्तरमिति सन्मात्रापेक्षया तदेवेदम् ।
न तदेवेदं नियमात् सदवस्थापेक्षया पुनः सदिति ॥310॥
अन्वयार्थ : आचार्य कहते हैं कि ठीक है, तुम्हारी शंका का उत्तर यह है कि सत्ता मात्र की अपेक्षा से तो सत् वही है, और सत् की अवस्थाओं की अपेक्षा से सत् वह नहीं है ।