शेषविशेषाख्यानं ज्ञातव्यं चोक्तवक्ष्यमाणतया ।
सूत्रे पदानुवृत्तिर्ग्राह्या सूत्रान्तरादिति न्‍यायात्‌ ॥335॥
अन्वयार्थ : अब इस विषय में जो विशेष व्याख्यान शेष है सो उस सम्बन्ध में कुछ तो पहले कह आये हैं और कुछ आगे कहेंगे, इसलिये वहां से जान लेना चाहिये, क्‍योंकि ऐसा न्याय है कि सूत्र में पदों की अनुवृत्ति अन्य सूत्रों से होती हुई देखी जाती है ॥३३५॥