+ क्या सत्‌ और परिणाम विन्ध्य हिमाचल के समान हैं? -
अथ किं खरतरदृष्टया विन्ध्यहिमाचलयुगं यथास्ति तथा ।
भवतु विवक्ष्यो मुख्यो विवक्तुरिच्छावशाद्गुणो ऽन्‍यतरः ॥343॥
अन्वयार्थ : अथवा ऐसा है क्‍या कि जिस प्रकार देखने में विन्ध्याचल और हिमालय ये स्वतन्त्र दो हैं, परन्तु दोनों में वक्ता की इच्छानुसार जो विवक्षित होता है, वह मुख्य हो जाता है और दूसरा गौण हो जाता है । उसी प्रकार क्या सत्‌ ओर परिणाम स्वतंत्र दो हैं और इन दोनों में जो विवक्षित होता है, वह मुख्य हो जाता है और दूसरा गौण हो जाता है ?