+ क्या सत्‌ और परिणाम सिंह साधु विशेषणों के समान हैं? -
अथ चेकः कोपि यथा सिंहः साधुर्विवक्षितो द्वेधा ।
सत्परिणामोपि तथा भवति विशेषणविशेष्यवत्‌किमिति ॥344॥
अन्वयार्थ : या ऐसा है कि जिस प्रकार कोई एक व्यक्ति कभी सिंह और कभी साधु दो तरह से विवक्षित होता है उसी प्रकार वस्तु कभी सत्‌ और कभी परिणामरूप से विवक्षित होती है । वस्तु का सत्‌ और परिणाम के साथ क्‍या इस तरह का विशेषण--विशेष्य सम्बन्ध है ?