+ क्या सत्‌ और परिणाम दो सपत्नियों के समान हैं? -
अथ कि कालक्रमतोप्युत्पन्नं वर्तमानमिव चास्ति ।
भवति सपत्नीद्वयमिह यथा मिथः प्रत्यनीकतया ॥347॥
अन्वयार्थ : अथवा क्या कालक्रम से उत्पन्न होकर भी ये दोनों वर्तमान काल में पररपर विरुद्ध भाव से रहते हैं ? जैसे कि आगे पीछे परणी हुई दो सपत्नियाँ वर्तमान काल में परस्पर विरुद्ध भाव से रहती हैं ?