+ क्या सत् और परिणाम वाच्य-वाचक के समान हैं? -
अथ किं वागर्थद्वयमिव सम्पृक्तं सदर्थसंसिद्धयै ।
पानकवत्तन्रियमादर्थाभि व्यन्जकं द्वैतात्‌ ॥353॥
अन्वयार्थ : अथवा सत् और परिणाम ये दोनों अर्थसिद्धि के लिये वचन और अर्थ के समान संपृक्त होकर पेय पदार्थ के समान मिलकर नियम से अर्थ के अभिव्यंजक हैं क्या ?