
अथ किमवश्यतया तद्वक्तवयं स्यादनन्यथासिद्धे: ।
भेरी दन्डवदुभयोः संयोगादिव विवक्षितः सिद्धयेत् ॥354॥
अन्वयार्थ : अथवा दोनों के बिना अर्थ-सिद्धि नहीं होती इसलिए सत् और परिणाम इन दोनों का कथन करना आवश्यक है, क्योंकि जिस प्रकार भेरी और दण्ड के संयोग से विवक्षित कार्य सिद्ध होता है इसी प्रकार क्या सत् और परिणाम के सम्बन्ध से पदार्थ की सिद्धि होती है ?