+ क्या सत् और परिणाम आदेश (शत्रु) के समान हैं? -
शत्रु वदादेश: स्यात्तद्वत्तद्-द्वैतमेव किमिति यथा ।
एकं विनाश्य मूलादन्यतमः स्वयमुदेति निरपेक्ष: ॥357॥
अन्वयार्थ : अथवा आदेश शत्रु के समान होता है उसी प्रकार ये दोनों हैं क्या ? जिससे कि इनमें से कोई एक दूसरे का समूल नाश करके निरपेक्ष भाव से स्वयं उदित होता है ?