
सदभावे परिणामो भवति न सत्ताक आश्रयाभावात् ।
दीपाभावे हि यथा तत्क्षणमिव दृश्यते प्रकाशो न ॥389॥
अन्वयार्थ : जिसप्रकार दीपक का अभाव होने पर उसीसमय प्रकाश का भी अभाव हो जाता है, कारण -- दीपक प्रकाश का आश्रय है, बिना दीपक के प्रकाश किसके आश्रय ठहरे उसीप्रकार सत् के अभाव में परिणाम भी अपनी सत्ता नहीं रख सकता है, कारण -- परिणाम का सत् आश्रय है, बिना आश्रय के आश्रयी कैसे रह सकता है ?