+ सामान्य विशेष मे अन्तर -
बहुव्यापकमेवैतत्‌ सामान्यं सदृशत्वतः ।
अस्त्यल्पव्यापको वस्तु विशेषः सदृशेतरः ॥2॥
अन्वयार्थ : सामान्य बहुत वस्तुओं में रहता है। क्‍योंकि अनेक वस्तुओं में रहनेवाले समान धर्म को ही सामान्य कहते हैं । विशेष बहुत वस्तुओं में नहीं रहता, किन्तु ख़ास-ख़ास वस्तुओं में जुदा जुदा रहता है । जो बहुत देश में रहे उसे व्यापक कहते हैं और जो थोड़े देश में रहे उसे व्याप्य कहते हैं । सामान्य व्यापक है और विशेष व्याप्य है । अस्तित्व गुण एक द्रव्य के सभी अनन्त गुणों में रहता है क्योंकि सभी गुण भावात्मक हैं परन्तु ज्ञान दर्शन आदि गुण जुदे-जुदे हैं अतः एक द्रव्य में अस्तित्व गुण सामान्य है और अन्य गुण विशेष हैं अत: एक द्रव्य में भी व्याप्य-व्यापक भाव है ।