
जीवाजीवविशेषोस्ति द्रव्याणां शब्दतोर्थतः ।
चेतनालक्षणो जीव: स्यादजीवोप्यचेतनः ॥3॥
अन्वयार्थ : द्रव्य के मूल में दो भेद हैं जीव द्रव्य और अजीव द्रव्य । ये दोनों भेद शब्द की अपेक्षा से भी हैं और अर्थ की अपेक्षा से भी हैं । जीव और अजीव ये दो वाचक रूप शब्द हैं । इनके वाच्य भी दो प्रकार हैं एक जीव और दूसरा अजीव । इसप्रकार शब्द की अपेक्षा से दो भेद हैं । अर्थ की अपेक्षा से भी दो भेद हैं । जिसमें ज्ञान दर्शनादिक गुण पाये जाँय, वह जीव द्रव्य है और जिसमें ज्ञान दर्शन आदिक गुण न पाये जाँय वह अजीव द्रव्य है ।