+ जीव सिद्धि में अनुमान -
अस्ति जीवः सुखादीनां संवेदनसमक्षतः ।
यो नैवं स न जीवोस्ति सुप्रसिद्धो यथा घटः ॥5॥
अन्वयार्थ : जीव एक स्वतन्त्र पदार्थ है इस विषय में सुखादिकों का स्व-संवेदन ज्ञान ही प्रमाण है । जो सुखादिक का अनुभव नहीं करता है वह जीव भी नहीं है, जैसे घड़ा ।