
मूर्तामूर्तविशेषश्च द्रव्याणां स्यान्निसर्गतः ।
मूर्तं स्थादिन्द्रियग्राह्यं तदग्राह्यममूर्तिमत् ॥7॥
अन्वयार्थ : छहों द्रव्यों में कुछ द्रव्य तो मूर्त हैं और कुछ अमूर्त हैं । द्रव्यों में यह मूर्त ओर अमूर्त का भेद स्वभाव से ही है किसी निमित्त से किया हुआ नहीं है । जो इन्द्रियों से ग्रहण किया जा सके उसे मूर्त कहते हैं और जो इन्द्रियों से ग्रहण न हो उसे अमूर्त कहते हैं ।