
न पुनर्वास्तवं मूर्तममूर्तं स्यादवास्तवम् ।
सर्वशून्यादिदोषाणां सन्निपातात्तथा सति ॥8॥
अन्वयार्थ : [न पुन:] किन्तु ऐसा नहीं है कि [मूर्तं र्वास्तवं] मूर्त ही यथार्थ में पदार्थ हो और [अमूर्तं स्यादवास्तवम्] अमूर्त कोई वस्तु ही नहीं हो क्योंकि [तथासति] ऐसा मानने पर [सर्वशून्यादिदोषाणां सन्निपातात्] सर्व-शून्यादि दोषों का प्रसंग आता है ।