+ मूर्त का ही इन्द्रिय प्रत्यक्ष होता है -
नासंभवं॑ मवदेतत् प्रत्यक्षानुभवाद्यथा ।
सन्निकर्षोस्ति वर्णाद्यैरिन्द्रियाणां न चेतरै: ॥10॥
अन्वयार्थ : इन्द्रियों का रूपादिक के साथ ही सम्बन्ध होता है और दूसरे पदार्थों के साथ नहीं होता यह बात असम्भव नहीं है किन्तु प्रत्यक्ष और अनुभव से सिद्ध है ।