
नन्वमूर्तार्थसद्भावे किं प्रमाणं वदाद्य नः ।
यद्विनापीन्द्रियार्थाणां सन्निकर्षात् खपुष्पवत् ॥11॥
अन्वयार्थ : [ननु] शंकाकार का कहना है कि [अमूर्तार्थसद्भावे] अमूर्त पदार्थ के सद्भाव में [किं प्रमाण] क्या प्रमाण हैं [इति अद्य न वद] यह अब हमें बताओ क्योंकि [इन्द्रियार्थाणां] इन्द्रिय और अर्थ के [सन्निकर्षात् विना] सन्निकर्ष के बिना [यत् अपि] जो कुछ है [तत्] वह सब [खपुष्पवत्] आकाश पुष्प के समान है ।