+ सारांश -
ततः सिद्धं चिदात्मादि स्यादमूर्तं तदर्थवत् ।
प्रसाधितसुखादीनामन्यथाऽनुपपत्तितः ॥16॥
अन्वयार्थ : इसलिये यह बात सिद्ध हो चुकी कि आत्मा आदि अमूर्त पदार्थ भी वास्तविक हैं इनको न मानने से स्वानुभव सिद्ध सुख-दुख आदि की प्राप्ति नहीं हो सकती ।