
तस्माद्वर्णादिशून्यात्मा जीवाद्यर्थोस्त्यमूर्तिमान् ।
स्वीकर्तव्यः प्रमाणाद्वा स्वानुभूतेर्यथागमात् ॥21॥
अन्वयार्थ : इसलिये वर्णादिक से रहित जीवादिक पदार्थ अमूर्त हैं ऐसा उपर्युक्त प्रमाण से स्वीकार करना चाहिये अथवा स्वानुभव से स्वीकार करना चाहिये । आगम भी इसी बात को बतलाता है कि वर्णादिक पुद्गल के गुण हैं और बाकी जीवादिक पाँच द्रव्य अमूर्त हैं ।