+ लोक और अलोक -
लोकालोकविशेषोस्ति द्रव्याणां लक्षणाद्यथा ।
षड्द्रव्यात्मा स लोकोस्ति स्यादलोकस्ततोऽन्‍यथा ॥22॥
अन्वयार्थ : द्रव्यों के लक्षण की अपेक्षा से ही लोक और अलोक का विभाग होता है । जहाँ पर छह द्रव्य पाये जाँय अथवा जो छह द्रव्य स्वरूप हो उसे लोक कहते हैं । और जहाँ छह द्रव्य नहीं पाये जाँय उसे अलोक कहते हैं ।