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क्रिया और भाव का लक्षण
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तत्र क्रिया प्रदेशानां परिस्पंदश्चलात्मकः ।
भावस्तत्परिणामोस्ति धारावाह्येकवस्तुनि ॥26॥
अन्वयार्थ :
प्रदेशों के हिलने-चलने को क्रिया कहते हैं और भाव परिणाम को कहते हैं जो कि प्रत्येक वस्तु में धारावाही
(बराबर)
से होता रहता है ।