नासंभवमिदं यस्मादर्थाः परिणामिनोऽनिशं ।
तत्र केचित् कदाचिद्वा प्रदेशचलनात्मका: ॥27॥
अन्वयार्थ :
यह बात असिद्ध नहीं है कि पदार्थ प्रतिक्षण परिणमन करते रहते हैं । उसी परिणमन में कभी-कभी किन्हीं-किन्हीं पदार्थों के प्रदेश भी हलन-चलन करते हैं ।