+ जीव और कर्म का सम्बन्ध अनादि से है -
यथानादिः स जीवात्मा यथानादिश्च पुद्गलः ।
द्वयोर्बन्धोप्यनादिः स्यात्‌ सम्बन्धो जीवकर्मणोः ॥35॥
अन्वयार्थ : यह जीवात्मा भी अनादि है और पुद्गल भी अनादि है । इसलिये दोनों का सम्बन्धरूप बंध भी अनादि है ।