+ सारांश -
तत्सिद्ध: सिद्धसम्बन्धो जीवकर्मोभयोर्मिथः ।
सादिसिद्धेरसिद्धत्वात्‌ असत्संदृष्टितश्च तत्‌ ॥40॥
अन्वयार्थ : इसलिये जीव और कर्म का सम्बन्ध प्रसिद्ध है और वह अनादिकाल से बन्धरूप है यह बात सिद्ध हो चुकी । जो पहले शंकाकार ने जीव-कर्म का सम्बन्ध सादि (किसी समय विशेष से) सिद्ध किया था वह नहीं सिद्ध हो सका । सादि सम्बन्ध मानने से इतरेतर (अन्योन्याश्रय) आदि अनेक दोष आते हैं तथा दृष्टान्त भी कोई ठीक नहीं मिलता ।