+ केवल प्रदेशों के सम्बन्ध को बन्ध नहीं कहते हैं -
न केवलं प्रदेशानां बन्‍धः सम्बन्धमात्रत: ।
सोऽपि भावैरशुद्धै: स्यात्सापेक्षस्तदद्वयोरिति ॥44॥
अन्वयार्थ : [इति] इसप्रकार [तदद्वयो:] उन जीव और कर्मों के [अशुद्धै: भावे] अशुद्ध भावों से [सापेक्ष:] अपेक्षा रखेनवाला [स बन्ध अपि] वह बन्ध भी [केवलं] केवल [प्रदेशानां] प्रदेशों के [सम्बन्धमात्रत] सम्बन्धमात्र से ही [न स्यात्] नहीं होता है ।