+ बन्ध के प्रकार -
अर्थतस्त्रिविधो बन्धो भावद्रव्योभयात्मकः ।
प्रत्येकं तदद्वयं यावत्तृतीयो द्वन्द्वज: क्रमात्‌ ॥46॥
अन्वयार्थ : [अर्थतः] वास्तव में [भावद्रव्योभयात्मकः] भाव द्रव्य और उभय इस तरह [बन्ध: त्रिविध] बन्‍ध तीन प्रकार का है उनमें से [क्रमात्‌ प्रत्येक तद्‌द्वयं यावत्‌] क्रम से भाव-बन्ध तथा द्रव्य-कर्मबन्ध ये दो बन्ध प्रत्येक रूप से स्वतन्त्ररूप से होते हैं और [तृतीय: द्वन्दज] तीसरा उभय बंध दोनों के मेल से होता है ।