रागात्मा भावबन्धः स जीवबन्ध इति स्मृतः ।
द्रव्यं पौद्गलिक: पिण्डो बन्धस्तच्छाक्तिरेव वा ॥47॥
अन्वयार्थ : [य: रागात्मा भावबन्ध] जो रागादिरूप भाव-बन्ध है [सः जीवबन्धः इति स्मृत:] वह जीव-बन्ध कहलाता है और [पौद्गलिक: पिण्डो द्रव्यं] कर्मरूप पौद्गलिक पिंड को द्रव्य-बन्ध [वा] अथवा [तच्छक्ति: एव बन्ध:] कर्म की शक्ति का ही नाम द्रव्य-बन्ध है ।