नैवं यतः स्वतः सिद्ध: स्वभावोऽतर्कगोचर: ।
तस्मादर्हति नाक्षेपं चेत्‌परीक्षां च सोर्हति ॥53॥
अन्वयार्थ : [एवं न] ऐसा नहीं है [यतः] क्योंकि [स्वतः सिद्ध: स्वभाव] अनादिकाल के बन्धरूप स्वतः सिद्ध स्वभाव [अतर्कगोचर:] तर्क विषय नहीं होता है [तस्मात्] इसलिये [सः] वह स्वतः सिद्ध स्वभाव [आक्षेपं न अर्हति] अक्षेप करने योग्य नहीं है [व] और [चेत्‌] चाहो तो [परीक्षां अर्हति] उसकी परीक्षा की जा सकती है ।