नैवं यतो विशेषोस्ति बद्धाबद्धावबोधयोः ।
मोहकर्मावृतो बद्ध: स्यादबद्धस्तदत्ययात्‌ ॥66॥
अन्वयार्थ : [एवं न] ऐसा नहीं है [यतः] क्योंकि [बद्धाबद्धावबोधयोः] बद्ध और अबद्ध ज्ञान में [विशेषोस्ति] भेद है उनमें से [मोहकर्मावृतो बद्ध:] मोहनीय कर्म से आवृत ज्ञान बद्ध है तथा [स्यादबद्धस्तदत्ययात्‌] उस (मोहनीय कर्म) से रहित ज्ञान अबद्ध है ।