
नासिद्धं सिद्धदृष्टान्तात् एतद्-दृष्टोपलब्धितः ।
शीतोष्णानुभवः स्वास्मिन् न स्यात्तज्ज्ञे परात्मनि ॥69॥
अन्वयार्थ : [एतत्] यह उक्त कथन [सिद्धदृष्टान्तात्] प्रसिद्ध इस दृष्टांत से और [दृष्टोपलब्धितः] प्रत्यक्ष प्रमाण से सिद्ध होने के कारण [असिद्ध न] असिद्ध नहीं है क्योंकि [स्वस्मिन] अपने में [शीतोष्णानुभवः] शीत तथा उष्ण का अनुभव होता है किंतु [तज्ज्ञे परात्मनि] उस सबके जाननेवाले परमात्मा में [न स्यात्] नहीं होता ।