
ननु बद्धत्वं किं नाम किमशुद्धत्वमर्थत: ।
वावदूकोऽथ संदिग्धो बोध्य: कश्चिदिति क्रमत् ॥71॥
अन्वयार्थ : [अथ] अब [ननु] शंकाकार का कहना है कि [अर्थतः] वास्तव में [बद्धत्वं कि नाम] बद्धत्व किसे कहते है और [अशुद्धत्वं कि नाम] अशुद्धत्व किसे कहते हैं [इति] इस विषय में [संदिग्ध कश्चित् वावदूक:] संदेह रखनेवाले किसी वादी को [क्रमात्] क्रम से [बोध्य:] समझाया जाता है ।