
अपि चाचेतनं मूर्तं पौद्गलं कर्म तद्यथा ।
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अन्वयार्थ : [अपि च] तथा [तत्कर्म] वह कर्म [अचेतनं] अचेतन [मूर्तं] मूर्त और [पौद्गलं] पौद्गलिक है [यथा] जैसे कि ..
*इस पद्य का उत्तरार्ध उपलब्ध नहीं है