+ बद्धता और शुद्धता एक ही प्रतीत होते हैं, क्या उनमें अंतर है ? -
ननु कस्को विशेषोस्ति बद्धाबद्धत्वयोर्द्वयो: ।
अस्त्यनर्थान्तरं यस्मादर्थादैक्योपलब्धितः ॥128॥
अन्वयार्थ : [ननु] शंकाकार का कहना है कि [बद्धाबद्धत्वयोर्द्वयो:] उन दोनों बद्धता और शुद्धता में [क: क: विशेषोस्ति] क्या-क्या अंतर है [यस्मात् अर्थात्] क्योंकि वास्तव में [ऐक्योपलब्धितः] उन दोनों में एकता पाई जाने के कारण [अनर्थांतर अस्ति] कुछ अर्थान्तर नहीं पाया जाता है ।