
नैवं यतो विशेषोस्ति हेतुमद्धेतुभावतः ।
कार्यकारणभेदाद्वा द्वयोस्तल्लक्षणं यथा ॥129॥
बन्धः परगुणाकारा क्रिया स्यात्पारिणामिकी ।
तस्यां सत्यामशुद्धत्वं तद्द्वयो: स्वगुणच्युति: ॥130॥
अन्वयार्थ : [एवं न यत:] ऐसा नहीं है क्योंकि [हेतुमद्धेतुभावतः] कार्य-कारणपने से [वा] अथवा [कार्यकारणभेदात्] कार्य कारण भेद से [द्वयो विशेष: अस्ति] दोनों में भेद है [यथा तल्लक्षण] जैसे कि उनका लक्षण इस-प्रकार है ।
[परगुणाकारा पारिणामिकी क्रिया] परगुण के आकाररूप पारिणामिकी क्रिया [बंध स्यात्] बंध कहलाती है [तस्यां सत्याम्] उसी क्रिया के होने पर ही जो [तद्द्वयो: स्वगुणच्युति:] उन दोनों का अपने-अपने गुणों से च्युत होना [अशुद्धत्वं] अशुद्धता है ।