बन्धहेतुरशुद्धत्वं हेतुमच्चेति निर्णयः ।
यस्माद्बन्धं विना न स्यादशुद्धत्वं कदाचन ॥131॥
अन्वयार्थ : [बन्धहेतु:] बंध कारण है [च शुद्धत्वं हेतुमत्] और शुद्धता बंध का कार्य है [इति निर्णयः] यह निश्चित है [यस्माद्बन्धं विना] क्योंकि बंध के बिना [न स्यादशुद्धत्वं कदाचन] कभी भी अशुद्धता नहीं होती है ।