
एक: शुद्धनयः सर्वो निर्द्वंदो निर्विकल्पकः ।
व्यवहारनयोऽनेकः सद्वन्दः सविकल्पकः ॥134॥
अन्वयार्थ : [शुद्धनयः सर्व:] सम्पूर्ण शुद्वनय [एकः निर्द्वंद निर्विकल्पकः] एक, निर्द्वंद और निर्विकल्प है तथा [व्यवहारनय] व्यवहारनय [अनेक] अनेक [सद्वन्द] द्वंद्व-सहित और [सविकल्पकः] सविकल्प है ।